इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह एक शोध-ग्रंथ है जिसका विषय ‘योगवासिष्ठ महारामायण’ नामक विशाल दार्शनिक ग्रंथ की रचना के समय का निर्धारण करना है। योगवासिष्ठ, जिसमें वशिष्ठ ऋषि राजकुमार राम को अद्वैत वेदांत का उपदेश देते हैं, अपनी अनूठी कथा शैली और गहन दर्शन के लिए प्रसिद्ध है। इसके रचनाकाल को लेकर विद्वानों में मतभेद रहा है। इस शोध कृति में लेखक ने संभवतः विभिन्न आंतरिक और बाह्य साक्ष्यों, जैसे भाषा-शैली, दार्शनिक अवधारणाओं के विकास, और अन्य ग्रंथों में इसके उल्लेख, का विश्लेषण करके योगवासिष्ठ के रचनाकाल पर एक तर्कपूर्ण निष्कर्ष प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
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