इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक महर्षि पतंजलि के “योगसूत्र” का एक अनूठा और तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करती है, जिसमें सूत्रों की व्याख्या ‘बुद्धवाणी’ अर्थात् भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के परिप्रेक्ष्य में की गई है। इसमें लेखक ने योग दर्शन और बौद्ध दर्शन के बीच की समानताओं और सूक्ष्म अंतरों को उजागर करने का प्रयास किया है। पुस्तक में चित्त की वृत्तियों का निरोध, ध्यान, समाधि, और कैवल्य (मोक्ष) जैसी अवधारणाओं को दोनों परंपराओं के दृष्टिकोण से समझाया गया होगा। यह उन जिज्ञासुओं और साधकों के लिए एक विचारोत्तेजक कृति है जो भारत की दो महान आध्यात्मिक धाराओं के बीच संवाद को समझना चाहते हैं और अपने अभ्यास को एक व्यापक दार्शनिक आधार देना चाहते हैं।
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