इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक शिक्षाप्रद और चक्रीय बोध-कथा है। कहानी एक छोटे चूहे के बारे में है जो एक बिल्ली से डरता है। एक ऋषि उसे अपनी जादुई शक्ति से एक बिल्ली बना देते हैं। अब वह एक कुत्ते से डरने लगता है, तो ऋषि उसे एक कुत्ता बना देते हैं। फिर वह एक बाघ से डरता है, और ऋषि उसे एक बाघ बना देते हैं। लेकिन एक बाघ बनने के बाद भी, वह शिकारियों से डरता है। तब ऋषि को एहसास होता है कि चूहे का डर बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक है। वे उसे वापस एक चूहा बना देते हैं और कहते हैं, “जब तक तुम अंदर से एक चूहे की तरह डरते रहोगे, कोई भी बाहरी रूप तुम्हारी मदद नहीं कर सकता”। यह सच्ची निडरता और आत्म-विश्वास पर एक गहरा सबक है।
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