इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘हिंदी कहानियों के विकास’ पर एक साहित्यिक इतिहास या आलोचना की पुस्तक है। इसमें हिंदी कहानी की यात्रा का विश्लेषण किया गया है, जिसमें उसकी प्रारंभिक अवस्था से लेकर प्रेमचंद युग, और उसके बाद के विभिन्न आंदोलनों (जैसे नई कहानी, अकहानी) तक के विकास को दर्शाया गया है। यह पुस्तक प्रमुख कहानीकारों और उनकी रचनाओं की प्रवृत्तियों का मूल्यांकन करती है और हिंदी कहानी के बदलते स्वरूप को समझने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करती है।
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