इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह छायावाद के प्रवर्तक, महाकवि जयशंकर प्रसाद के व्यक्तित्व और उनके संपूर्ण ‘साहित्य’ पर एक आलोचनात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत करने वाली कृति है। इसमें उनके महाकाव्य ‘कामायनी’, उनके नाटकों (जैसे- स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त), और उनकी कहानियों तथा उपन्यासों का गहन विश्लेषण किया गया है। यह पुस्तक प्रसाद जी के साहित्य में निहित दार्शनिक चिंतन, राष्ट्रीय चेतना और कलात्मक सौंदर्य को उजागर करती है।
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