इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
पंडित सुखलालजी, जो एक प्रख्यात जैन विद्वान और दार्शनिक थे, की यह पुस्तक ‘दर्शन और चिंतन’ पर उनके गहन और मौलिक लेखों का एक संग्रह है। इसमें उन्होंने भारतीय दर्शन, विशेषकर जैन दर्शन के विभिन्न सिद्धांतों पर स्वतंत्र और तर्कपूर्ण चिंतन प्रस्तुत किया है। यह कृति किसी भी विषय को आँख बंद करके स्वीकार करने के बजाय उस पर गहराई से विचार करने और उसकी तार्किक पड़ताल करने पर जोर देती है। यह दर्शन के गंभीर अध्येताओं के लिए एक बौद्धिक खजाना है।
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