Sankhya (सांख्य)
सांख्य’ भारतीय दर्शन के सबसे पुराने दर्शनों में से एक है, जिसके प्रणेता कपिल मुनि थे। यह दर्शन सृष्टि को दो मूल तत्वों से बना हुआ मानता है – ‘पुरुष’ (चेतना) और ‘प्रकृति’ (पदार्थ)। सांख्य हमें सिखाता है कि दुख का कारण पुरुष का प्रकृति के साथ खुद को जोड़ लेना है, और मोक्ष इसी भेद को जानकर प्राप्त होता है। योग दर्शन का आधार भी सांख्य ही है। इस श्रेणी की किताबें आपको सृष्टि और चेतना के इस द्वैतवादी सिद्धांत को समझने में मदद करेंगी और एक तार्किक दृष्टिकोण प्रदान करेंगी।
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