इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
सिंहावलोकन’ का अर्थ है एक विहंगम दृष्टि या समग्र अवलोकन। यह पुस्तक भारतीय कला की हजारों वर्षों की लंबी और विविध परंपरा का एक संक्षिप्त और सारगर्भित परिचय प्रस्तुत करती है। इसमें प्रागैतिहासिक चित्रकला से लेकर सिंधु घाटी की मुहरों, मौर्य-गुप्त काल की मूर्तिकला, मंदिर स्थापत्य, और मुगल तथा राजपूत चित्रकला तक की प्रमुख उपलब्धियों की एक झलक प्रस्तुत की गई है। यह कला-प्रेमियों के लिए भारतीय कला में प्रवेश हेतु एक उत्तम प्रारंभिक ग्रंथ है।
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