इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
सूत्रार्थ-मुक्तावलि’ का अर्थ है ‘सूत्रों के अर्थ की मोतियों की माला’। यह आचार्य विजयलब्धि सूरि द्वारा रचित एक जैन ग्रंथ है, जो महत्वपूर्ण जैन ‘सूत्रों’ के अर्थ को ‘मोतियों की माला’ की तरह व्यवस्थित और सुंदर ढंग से प्रस्तुत करता है। ‘सटीका’ का अर्थ है कि इसमें मूल ग्रंथ के साथ-साथ उसकी एक टीका या विस्तृत व्याख्या भी शामिल है, जो गूढ़ सूत्रों के अर्थ को और भी स्पष्ट करती है।
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