इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
फरीदाबाद मजदूर समाचार’ का फरवरी 1995 का यह अंक भारत में आर्थिक उदारीकरण के शुरुआती दौर में औद्योगिक मजदूरों की स्थिति पर एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ है। इस समय, नई आर्थिक नीतियों के कारण श्रमिक वर्ग नई चुनौतियों का सामना कर रहा था, जैसे नौकरी की असुरक्षा और श्रम कानूनों का कमजोर होना। इस अंक में इन परिवर्तनों के खिलाफ मजदूर आंदोलनों, संघों की रणनीतियों, और फरीदाबाद के कारखानों में विशिष्ट संघर्षों पर रिपोर्टिंग शामिल होगी। यह उस संक्रमण काल में श्रमिक वर्ग के दृष्टिकोण को समझने का एक मूल्यवान स्रोत है।
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