इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
महार्थमञ्जरी’ बारहवीं शताब्दी के कश्मीरी शैव दार्शनिक महेश्वरानन्द द्वारा रचित एक महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है। ‘महार्थ’ का अर्थ है ‘महान सत्य’ और ‘मञ्जरी’ का अर्थ है ‘फूलों का गुच्छा’। यह कृति कश्मीर शैवमत के ‘क्रम’ संप्रदाय के सिद्धांतों को काव्यात्मक और दार्शनिक रूप में प्रस्तुत करती है। इसमें परम शिव की बारह शक्तियों (काली) के माध्यम से ब्रह्मांड के उदय और विलय की प्रक्रिया का वर्णन है। यह ग्रंथ अपनी गहन दार्शनिक अंतर्दृष्टि और सुंदर काव्य शैली के लिए जाना जाता है।
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