इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
काम कला विलास’ पुण्यानन्द नाथ द्वारा रचित श्रीविद्या परंपरा का एक महत्त्वपूर्ण तांत्रिक ग्रंथ है। यह कृति देवी त्रिपुरसुंदरी (काम कला) के स्वरूप और उनके श्रीचक्र यंत्र के रहस्यमय अर्थ का वर्णन करती है। ‘विलास’ का अर्थ है ‘दिव्य लीला’। ग्रंथ में यह बताया गया है कि कैसे परम शिव और शक्ति के मिलन से ब्रह्मांड की उत्पत्ति होती है, और कैसे श्रीचक्र उसी ब्रह्मांडीय प्रक्रिया का एक ज्यामितीय प्रतिनिधित्व है। यह शक्ति उपासना के गूढ़ दार्शनिक और यौगिक सिद्धांतों पर एक संक्षिप्त लेकिन गहन ग्रंथ है।
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