इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक कपिल मुनि द्वारा रचित ‘सांख्य सूत्र’ पर एक ‘वैदिक वृत्ति’ या वैदिक दृष्टिकोण से लिखी गई टीका है। सांख्य भारत के सबसे प्राचीन दर्शनों में से एक है, जो सृष्टि को दो मूल तत्वों – पुरुष (चेतना) और प्रकृति (पदार्थ) – के संयोग से उत्पन्न मानता है। यह ‘वैदिक वृत्ति’ सांख्य के सिद्धांतों की व्याख्या वेदों और उपनिषदों के प्रकाश में करने का प्रयास करती है। इसका उद्देश्य यह दर्शाना हो सकता है कि सांख्य दर्शन नास्तिक नहीं, बल्कि वैदिक परंपरा का ही एक अभिन्न अंग है। यह टीका सांख्य के गूढ़ सूत्रों को खोलती है और उन्हें एक व्यापक वैदिक संदर्भ में स्थापित करती है।
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