इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
चंदामामा’ का सितंबर 1959 का यह अंक भारतीय बाल साहित्य के एक सुनहरे युग का प्रतिनिधित्व करता है। यह पत्रिका बच्चों के बीच भारतीय पौराणिक कथाओं, लोककथाओं और ऐतिहासिक गाथाओं को लोकप्रिय बनाने के लिए जानी जाती थी। इसकी अनूठी चित्रकला शैली और सरल, प्रवाहमयी भाषा हर उम्र के बच्चों को आकर्षित करती थी। इस अंक में विक्रम और बेताल की कोई कड़ी, किसी जातक कथा का चित्रण, या किसी राजा-रानी की साहसिक कहानी हो सकती है। ‘चंदामामा’ ने पीढ़ियों तक बच्चों की कल्पना को पंख दिए और उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ा। यह अंक उस विरासत का एक अनमोल हिस्सा है।
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