इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
अभिधर्मकोश’ या ‘अभिधर्मकोशभाष्यम्’ चौथी-पाँचवीं शताब्दी के महान बौद्ध दार्शनिक वसुबन्धु द्वारा रचित एक विश्वकोशीय ग्रंथ है। यह सर्वास्तिवाद बौद्ध संप्रदाय के ‘अभिधर्म’ (उच्चतर धर्म या दर्शन) का एक व्यवस्थित और व्यापक सारांश प्रस्तुत करता है। इसमें कारिकाओं (छंदों) और उन पर स्वयं वसुबन्धु द्वारा लिखे गए भाष्य के माध्यम से धर्म (अस्तित्व के मूल तत्त्व), कर्म, ब्रह्मांड विज्ञान, और मोक्ष के मार्ग जैसे विषयों का गहन विश्लेषण किया गया है। यह बौद्ध दर्शन के अध्ययन के लिए एक मौलिक और अनिवार्य ग्रंथ है।
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