इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
न्यायदर्शनम्’ महर्षि गौतम द्वारा रचित न्याय सूत्रों का मूल ग्रंथ है, जो भारतीय दर्शन की छह आस्तिक प्रणालियों में से एक है। न्याय दर्शन मुख्य रूप से तर्कशास्त्र (logic) और प्रमाणमीमांसा (epistemology) पर केंद्रित है। यह ज्ञान प्राप्त करने के सोलह पदार्थों और चार वैध साधनों (प्रमाण) – प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, और शब्द – का विस्तृत विवेचन करता है। न्याय दर्शन का उद्देश्य तार्किक चिंतन के माध्यम से मिथ्या ज्ञान को दूर करना और तत्त्वज्ञान प्राप्त करके मोक्ष (अपवर्ग) की प्राप्ति करना है। इसकी तर्क पद्धति ने अन्य सभी भारतीय दर्शनों को गहराई से प्रभावित किया है।
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