इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
अदृष्ट-परीक्षा’ का अर्थ है ‘अदृष्ट या भाग्य की परीक्षा’। यह एक दार्शनिक ग्रंथ हो सकता है जो ‘अदृष्ट’ अर्थात कर्म, भाग्य, या दैव की अवधारणा की तार्किक और दार्शनिक ‘परीक्षा’ या विश्लेषण करता है। यह इस प्रश्न की पड़ताल कर सकता है कि क्या सब कुछ पूर्व-निश्चित है या मनुष्य अपने कर्मों से अपना भाग्य बना सकता है। यह भारतीय दर्शन में कर्म और दैव के बीच के जटिल संबंध पर एक गहरा चिंतन है।
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