इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक 19वीं सदी के महत्वपूर्ण सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन “आर्य समाज” के इतिहास का एक विस्तृत और प्रामाणिक विवरण प्रस्तुत करती है। यह उस श्रृंखला का पहला भाग है, जो आंदोलन की शुरुआत से लेकर उसके संस्थापक, स्वामी दयानंद सरस्वती, के निधन (1883) तक की अवधि को कवर करता है। इसमें स्वामी दयानंद के जीवन-संघर्ष, उनके द्वारा ‘सत्यार्थ प्रकाश’ की रचना, 1875 में आर्य समाज की स्थापना, और उनके द्वारा किए गए शास्त्रार्थों का वर्णन होगा। यह पुस्तक उस युग की सामाजिक-धार्मिक पृष्ठभूमि और आर्य समाज के क्रांतिकारी विचारों (जैसे- वेदों की ओर लौटो, मूर्तिपूजा का खंडन) के उदय को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथ है।
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