इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक प्राचीन भारत की राजनीतिक व्यवस्था और राजशास्त्र के सिद्धांतों पर एक गहन ऐतिहासिक और विश्लेषणात्मक अध्ययन है। इसमें वैदिक काल की सभा और समिति से लेकर मौर्य साम्राज्य की केंद्रीयकृत प्रशासनिक व्यवस्था और गुप्त काल की शासन प्रणाली तक का विस्तृत वर्णन किया गया है। यह ‘अर्थशास्त्र’, ‘मनुस्मृति’ और ‘शांति पर्व’ जैसे ग्रंथों के आधार पर राजा के कर्तव्यों, मंत्रिपरिषद, न्याय-व्यवस्था, कराधान और कूटनीति के सिद्धांतों की विवेचना करती है। यह कृति प्राचीन भारत की राजनीतिक परिपक्वता को दर्शाती है और वर्तमान शासन प्रणालियों के लिए भी प्रासंगिक अंतर्दृष्टि प्रदान करती है।
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