इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
आत्म सिद्धि’ का अर्थ है ‘आत्म-ज्ञान की प्राप्ति’। यह 19वीं सदी के महान जैन संत और योगी, श्रीमद् राजचंद्र द्वारा रचित एक छोटी किन्तु अत्यंत गहन काव्य-कृति है। मात्र 142 छंदों में, यह आत्मा के अस्तित्व को तर्कों से सिद्ध करती है और मोक्ष-प्राप्ति का अचूक मार्ग बताती है। यह तर्क, दर्शन और आध्यात्मिकता का एक अद्भुत संगम है, और इसे आत्म-ज्ञान के साधकों के लिए एक अनिवार्य ग्रंथ माना जाता है।
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