इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
श्रीमद राजचंद्र द्वारा रचित ‘आत्मसिद्धि शास्त्र’ जैन अध्यात्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली ग्रंथ है। यह 142 गाथाओं (छंदों) का एक छोटा काव्य है, जिसमें आत्मा के स्वरूप, आत्म-ज्ञान की आवश्यकता और मोक्ष प्राप्ति के मार्ग का सटीक और तार्किक विवेचन किया गया है। यह कृति शिष्य और गुरु के बीच संवाद के रूप में है, जिसमें आत्मा से जुड़े छह मौलिक प्रश्नों का समाधान किया गया है। अपनी संक्षिप्तता और गहनता के कारण, यह ग्रंथ आत्म-कल्याण के इच्छुक साधकों के बीच बहुत सम्माननीय है और इसे ‘मोक्षमाला’ का सार भी माना जाता है।
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