इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक विचारोत्तेजक और दार्शनिक कृति है जो ‘विज्ञान’ शब्द की अवधारणा का ‘भारतीय दृष्टिकोण’ से विश्लेषण और समन्वय करती है। इसमें लेखक तर्क देता है कि भारत में ‘विज्ञान’ का अर्थ केवल भौतिक विज्ञान (Physical Science) तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें आध्यात्मिकता, चेतना और दर्शन (आत्म-विज्ञान) भी शामिल थे। यह पुस्तक प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक पश्चिमी विज्ञान के बीच एक संवाद स्थापित करने का प्रयास करती है, और ज्ञान की एक समग्र समझ को बढ़ावा देती है।
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