इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक 19वीं सदी के बंगाल के महान समाज सुधारक और ब्रह्म समाज के प्रमुख नेता, केशव चंद्र सेन के जीवन और उनके विचारों पर आधारित है। उन्हें ‘ब्रह्मानंद’ की उपाधि दी गई थी। इस जीवनी में उनके द्वारा ब्रह्म समाज में लाए गए सुधारों, उनके सामाजिक कार्यों (जैसे- बाल विवाह का विरोध), और श्री रामकृष्ण परमहंस के साथ उनके संबंधों का विस्तृत वर्णन है। यह भारतीय नवजागरण के एक महत्वपूर्ण अध्याय और एक दूरदर्शी विचारक की कहानी है।
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