इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“चंदामामा” भारत में बच्चों की एक प्रतिष्ठित और बहुत लोकप्रिय पत्रिका रही है, जो कई दशकों तक कई भाषाओं में प्रकाशित हुई। यह उसका फरवरी 1967 का अंक है। “चंदामामा” की पहचान उसकी सरल भाषा, सुंदर चित्र और भारतीय पौराणिक कथाओं, लोक कथाओं, और ऐतिहासिक कहानियों पर आधारित सामग्री थी। विक्रम-बेताल और अन्य धारावाहिक कहानियाँ इसकी विशेष पहचान थीं। यह अंक उस दौर के बच्चों के मनोरंजन और नैतिक शिक्षा का एक प्रमुख साधन था। यह न केवल एक बाल पत्रिका है, बल्कि 1960 के दशक की भारतीय संस्कृति, कला-शैली और सामाजिक मूल्यों को दर्शाने वाला एक nostalgische (पुरानी यादें ताजा करने वाला) दस्तावेज़ भी है।
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