इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक श्रीमद्भगवद्गीता के दो महत्वपूर्ण योगों – ‘संन्यास योग’ और ‘सांख्य योग’ – पर एक तुलनात्मक और विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करती है। लेखक ने इन दोनों मार्गों के वास्तविक स्वरूप, उनकी समानताओं और अंतरों को स्पष्ट किया है। यह इस भ्रम को दूर करती है कि संन्यास का अर्थ केवल कर्मों का त्याग है। इसके बजाय, यह गीता के अनुसार सच्चे संन्यास (कर्मफल का त्याग) और सांख्य (ज्ञान) के माध्यम से आत्म-साक्षात्कार के मार्ग को समझाती है।
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