इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘गीतिकाव्य’ के ‘विकास’ पर एक साहित्यिक-ऐतिहासिक ग्रंथ है। गीतिकाव्य, कविता की वह विधा है जिसमें कवि की व्यक्तिगत भावनाएँ और अनुभूतियाँ संगीतात्मक और संक्षिप्त रूप में व्यक्त होती हैं। यह पुस्तक हिंदी साहित्य में गीतिकाव्य की परंपरा का विश्लेषण करती है, जिसमें विद्यापति जैसे आदिकाल के कवियों से लेकर छायावादी और आधुनिक कवियों तक इसके बदलते स्वरूप और प्रवृत्तियों को दर्शाया गया है।
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