इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक संत कबीरदास द्वारा रचित ‘शब्द’ (या सबद) का संग्रह और व्याख्या प्रस्तुत करती है। ‘शब्द’ कबीर की शिक्षाओं और दार्शनिक विचारों को व्यक्त करने वाले गेय पद हैं। इस ग्रंथ में कबीर के शब्दों को संकलित किया गया है और उनकी सरल भाषा में टीका या भावार्थ दिया गया है, ताकि उनके गूढ़ अर्थ को आसानी से समझा जा सके। यह पहला भाग कबीर के निर्गुण भक्ति, सामाजिक सुधार, पाखंड के खंडन और आत्म-ज्ञान संबंधी विचारों को उजागर करता है। यह कबीर के क्रांतिकारी और मानवतावादी संदेश को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
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