इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
रांगेय राघव द्वारा लिखित यह पुस्तक ‘प्रगतिशील साहित्य’ के सिद्धांतों और उसके मूल्यांकन के मानदंडों पर एक आलोचनात्मक कृति है। प्रगतिशील आंदोलन साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का एक उपकरण मानता है, जो शोषितों और पीड़ितों की आवाज़ उठाता है। रांगेय राघव ने इस पुस्तक में यह विश्लेषण किया है कि कौन सी रचना वास्तव में प्रगतिशील है और कौन सी नहीं। उन्होंने कलात्मकता और सामाजिक उद्देश्य के बीच संतुलन पर जोर दिया है। यह हिंदी आलोचना में प्रगतिशील विचारधारा को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण और मौलिक ग्रंथ है।
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