इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक ‘ग्रामशाला’ (गाँव का स्कूल) और ‘ग्रामज्ञान’ (गाँव का पारंपरिक ज्ञान) के बीच संबंध पर एक चिंतनपूर्ण कृति है। यह इस विचार को बढ़ावा देती है कि ग्रामीण शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे स्थानीय परिवेश, कृषि, और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों से भी जोड़ा जाना चाहिए। इसका उद्देश्य एक ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित करना है जो ग्रामीण जीवन के लिए प्रासंगिक हो और बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़े रखे।
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