इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह जैन दर्शन के दो मौलिक सिद्धांतों – ‘जीव’ (आत्मा) और ‘कर्म’ – पर एक विचारपूर्ण ग्रंथ है। इसमें जीव के स्वरूप, उसके विभिन्न प्रकारों, और कर्म क्या हैं, वे आत्मा से कैसे जुड़ते हैं (बंध), और उनसे कैसे छुटकारा पाया जा सकता है (मोक्ष), इन विषयों की विस्तृत विवेचना की गई है। यह पुस्तक जैन तत्वज्ञान की आधारशिला को समझने और आत्म-कल्याण के मार्ग पर चलने के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शिका प्रदान करती है।
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