Deprecated: Function WP_Dependencies->add_data() was called with an argument that is deprecated since version 6.9.0! IE conditional comments are ignored by all supported browsers. in /home3/indiaq2f/indiankitab.com/wp-includes/functions.php on line 6170
जीव और कर्मविचार - Jeev Aur Karmvichar - Book
IndianKitab

जीव और कर्मविचार – Jeev Aur Karmvichar – Book

आपको यह बुक पसंद है? [ 0 / 0 ]

पुस्तक विवरण

यह जैन दर्शन के दो मौलिक सिद्धांतों – ‘जीव’ (आत्मा) और ‘कर्म’ – पर एक विचारपूर्ण ग्रंथ है। इसमें जीव के स्वरूप, उसके विभिन्न प्रकारों, और कर्म क्या हैं, वे आत्मा से कैसे जुड़ते हैं (बंध), और उनसे कैसे छुटकारा पाया जा सकता है (मोक्ष), इन विषयों की विस्तृत विवेचना की गई है। यह पुस्तक जैन तत्वज्ञान की आधारशिला को समझने और आत्म-कल्याण के मार्ग पर चलने के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शिका प्रदान करती है।

लेखकों और पुस्तकालयों का सहयोग करें। अगर आपको यह किताब पसंद आई है और आपके लिए संभव हो, तो इसकी एक प्रिंट कॉपी खरीदें या सीधे लेखक की आर्थिक मदद करें। आप अपने नज़दीकी पुस्तकालय में जाकर भी इस पुस्तक को मुफ़्त में पढ़ सकते हैं।

ज़रूरी सॉफ्टवेयर

इस ई-बुक को पढ़ने के लिए आपको एक रीडर ऐप की ज़रूरत होगी। आप मोबाइल के लिए ReadEra या कंप्यूटर के लिए Calibre जैसे फ्री ऐप इस्तेमाल कर सकते हैं।

फ़ॉर्मेट बदलना

क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।

ई-रीडर पर भेजें

आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।

कोई दिक्कत आ रही है?

चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।