इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक ‘कर्त्तव्य’ की अवधारणा पर केंद्रित एक नैतिक और दार्शनिक कृति हो सकती है। इसमें जीवन के विभिन्न क्षेत्रों—जैसे व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर—पर एक व्यक्ति के क्या कर्त्तव्य हैं, इसका विवेचन किया गया होगा। यह कृति संभवतः भारतीय दर्शन, विशेष रूप से गीता के ‘कर्मयोग’ से प्रेरणा लेती है, जहाँ फल की चिंता किए बिना अपने कर्त्तव्य का पालन करने पर बल दिया गया है। पुस्तक का उद्देश्य पाठकों को उनके उत्तरदायित्वों के प्रति जागरूक करना और एक नैतिक एवं जिम्मेदार जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है।
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