इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक दार्शनिक ग्रंथ है, जिसका शीर्षक गुजराती में प्रतीत होता है। यह ‘करुणा के विचार’ का ‘उपयुक्ततावाद’ (Utilitarianism) के सिद्धांत के ‘विरुद्ध’ एक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। उपयुक्ततावाद ‘अधिकतम लोगों के अधिकतम सुख’ पर जोर देता है, जबकि यह कृति संभवतः करुणा और सहानुभूति को नैतिक निर्णय का एक स्वतंत्र और superior आधार मानती है। यह नीतिशास्त्र के गंभीर अध्येताओं के लिए एक गहन वैचारिक कृति है।
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