इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह सामवेद से संबंधित, प्रमुख उपनिषदों में से एक है। ‘केनोपनिषद्’ का नाम इसके पहले शब्द ‘केन’ (किसके द्वारा?) से पड़ा है। इसमें इस मौलिक प्रश्न के माध्यम से परम ब्रह्म के स्वरूप की खोज की गई है कि वह कौन सी शक्ति है जिसके द्वारा मन सोचता है, आँखें देखती हैं, और प्राण चलते हैं। यह उपनिषद् बताता है कि ब्रह्म इंद्रियों और मन से परे है, और उसे केवल आत्म-अनुभूति से ही जाना जा सकता है।
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