इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह 19वीं सदी की एक अग्रणी और निडर खोजी पत्रकार, नैल्ली ब्लाई, की प्रेरणादायक जीवनी है। “कुछ भी नहीं असंभव” का नारा उनके साहसिक और रिकॉर्ड-तोड़ कारनामों का सार है। उन्होंने एक मानसिक शरण में एक मरीज होने का नाटक करके वहाँ की भयानक स्थितियों का पर्दाफाश किया। उन्होंने जूल्स वर्न के उपन्यास के पात्र से भी तेज, केवल 72 दिनों में दुनिया भर की यात्रा करने का रिकॉर्ड बनाया। यह पुस्तक एक ऐसी महिला की कहानी है जिसने पत्रकारिता की सीमाओं को तोड़ा, सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, और यह साबित कर दिया कि एक दृढ़ संकल्प वाली महिला के लिए कुछ भी असंभव नहीं है।
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