इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक आचार्य कुन्दकुन्द के प्रसिद्ध जैन ग्रंथ ‘नियमसार’ पर आधारित प्रवचनों की श्रृंखला का छठा भाग है। ‘नियमसार’ मोक्ष-प्राप्ति के लिए साधक के वास्तविक ‘नियम’ या शुद्ध आचरण का वर्णन करता है। यह प्रवचन श्रृंखला इस गूढ़ ग्रंथ के श्लोकों की सरल और विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत करती है, ताकि आम साधक भी आत्मा की शुद्धता और निश्चय-रत्नत्रय के मार्ग को समझ सकें। यह छठा खंड उसी आध्यात्मिक चर्चा को आगे बढ़ाता है, जो आत्म-कल्याण के पथिकों के लिए है।
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