इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह नव्य-न्याय दर्शन के एक प्रमुख ग्रंथ ‘न्यायसिद्धान्त-मुक्तावली’ का ‘प्रत्यक्ष-खण्ड’ है। यह ग्रंथ आचार्य विश्वनाथ की ‘भाषा-परिच्छेद’ पर उनकी स्वयं की टीका है। यह ‘प्रत्यक्ष-खण्ड’ ज्ञान के स्रोतों में से पहले, यानी ‘प्रत्यक्ष’ (Perception), पर एक अत्यंत सूक्ष्म और तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसमें प्रत्यक्ष के विभिन्न प्रकारों और उसकी प्रक्रिया की गहन दार्शनिक विवेचना की गई है, जो भारतीय तर्कशास्त्र का एक शिखर है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।