इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
प्रवचनसार कर्णिका’ आचार्य कुंदकुंद के महान ग्रंथ ‘प्रवचनसार’ पर आधारित एक टीका या संक्षिप्त सार हो सकती है। ‘कर्णिका’ का अर्थ है कमल का मध्य भाग या सार-तत्व। यह कृति ‘प्रवचनसार’ के गूढ़ दार्शनिक सिद्धांतों, जैसे शुद्ध आत्मा का स्वरूप, ज्ञान और चारित्र को सरल और सुगम रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करती है। इसका उद्देश्य मूल ग्रंथ के सार को पाठकों तक पहुंचाना है, ताकि वे आत्म-विद्या के रहस्यों को आसानी से समझ सकें। यह स्वाध्याय करने वालों के लिए एक उपयोगी सहायक ग्रंथ है।
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