इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक आचार्य कुन्दकुन्द द्वारा रचित प्रसिद्ध जैन ग्रंथ ‘प्रवचनसार’ पर आधारित प्रवचनों का दूसरा खंड है। ‘प्रवचनसार’ में ज्ञेयतत्त्व, ज्ञानतत्त्व और चारित्रतत्त्व का गहन विवेचन है। इस पुस्तक में किसी महान विद्वान या संत द्वारा ‘प्रवचनसार’ की गाथाओं की सरल और विस्तृत व्याख्या की गई है, ताकि आम लोग भी इसके गूढ़ दार्शनिक सिद्धांतों को समझ सकें। यह ग्रंथ आत्मा के शुद्ध स्वरूप को जानने और मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ने के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका है, जो स्वाध्याय करने वालों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
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