इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह जैन अध्यात्म के सर्वोच्च ग्रंथ, आचार्य कुन्दकुन्द के ‘समयसार’ पर एक ‘टीका’ अर्थात विस्तृत व्याख्या है। ‘समयसार’ शुद्ध आत्मा (‘समय’) के स्वरूप का वर्णन करता है और व्यवहार तथा निश्चय नय के माध्यम से आत्म-अनुभूति का मार्ग बताता है। यह टीका ‘समयसार’ की गहन और गूढ़ प्राकृत गाथाओं के अर्थ को खोलती है, जिससे साधकों के लिए उसके मर्म को समझना और ध्यान में उसका अनुभव करना संभव हो पाता है।
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