इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह कृति आचार्य कुन्दकुन्द के कालजयी ग्रंथ ‘समयसार’ पर दिए गए प्रवचनों का तीसरा भाग है। ‘समयसार’ जैन अध्यात्म का शिखर ग्रंथ है, जिसमें शुद्ध आत्मा (समय) के स्वरूप का अद्भुत वर्णन है। यह ग्रंथ आत्मा और कर्म के भेद-विज्ञान पर जोर देता है। इस प्रवचन पुस्तक में किसी ज्ञानी संत ने ‘समयसार’ की गूढ़ गाथाओं को आधुनिक संदर्भ में और सरल भाषा में समझाया है, ताकि साधक आत्म-अनुभूति के मार्ग पर आसानी से आगे बढ़ सकें। यह स्वाध्याय और आत्म-चिंतन के लिए एक उत्कृष्ट ग्रंथ है।
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