इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह एक शोधपरक कृति है जो सांख्य दर्शन के आचार्यों की परंपरा (गुरु-शिष्य परंपरा) का ऐतिहासिक और दार्शनिक अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें महर्षि कपिल से लेकर ईश्वरकृष्ण (‘सांख्यकारिका’ के रचयिता) और वाचस्पति मिश्र जैसे परवर्ती टीकाकारों तक, सांख्य दर्शन के प्रमुख विचारकों के जीवन, उनके कार्यों और उनके दार्शनिक योगदानों का विवेचन किया गया होगा। यह ग्रंथ सांख्य दर्शन के विचारों के विकास-क्रम को समझने और विभिन्न आचार्यों के बीच मतभेदों और समानताओं का विश्लेषण करने का प्रयास करता है, जिससे इस प्राचीन दर्शन की एक स्पष्ट ऐतिहासिक रूपरेखा मिलती है।
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