इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक संभवतः ‘संरक्षकता’ या ‘ट्रस्टीशिप’ (Trusteeship) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसकी अवधारणा महात्मा गांधी ने दी थी। इस सिद्धांत के अनुसार, अमीरों को अपनी आवश्यकता से अधिक संपत्ति का स्वयं को केवल ‘संरक्षक’ या ‘ट्रॉस्टी’ समझना चाहिए और उसे समाज के कल्याण के लिए उपयोग करना चाहिए। यह कृति इस गांधीवादी आर्थिक दर्शन की विस्तृत व्याख्या करती है और एक समतामूलक समाज के निर्माण के लिए इसके महत्व पर प्रकाश डालती है।
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