इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह मराठी शीर्षक का अर्थ है “स्कूल इतने उबाऊ क्यों होते हैं?”। यह पुस्तक पारंपरिक स्कूली शिक्षा प्रणाली पर एक आलोचनात्मक टिप्पणी है, जो संभवतः जॉन होल्ट जैसे शिक्षा सुधारकों के विचारों से प्रेरित है। यह तर्क देती है कि स्कूल अक्सर बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा और रचनात्मकता को दबा देते हैं। यह पुस्तक सीखने के अधिक आनंददायक, बाल-केंद्रित और सार्थक तरीकों की वकालत करती है।
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