इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“श्रीज्ञानेश्वरी” 13वीं शताब्दी के महान संत ज्ञानेश्वर द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता पर मराठी भाषा में लिखी गई एक अद्वितीय और विस्तृत टीका (भाष्य) है। इसे केवल एक टीका ही नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र दार्शनिक और काव्यात्मक ग्रंथ माना जाता है। संत ज्ञानेश्वर ने गीता के गूढ़ ज्ञान को ‘ओवी’ नामक छंद में, आम लोगों के लिए सुलभ और सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। इसमें भक्ति, ज्ञान और योग का अद्भुत समन्वय है। उनकी भाषा अत्यंत काव्यात्मक और प्रेमपूर्ण है, जो दार्शनिक शुष्कता को भक्ति की सरसता से भर देती है। यह मराठी साहित्य का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ और वारकरी संप्रदाय का एक आधार स्तंभ माना जाता है।
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