इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह हिंदू धर्म में एक अत्यंत लोकप्रिय और व्यापक रूप से प्रचलित व्रत-कथा है। यह पुस्तक भगवान विष्णु के ‘सत्यनारायण’ (सत्य के नारायण) स्वरूप को समर्पित है। इसमें वह कथा संकलित है जिसे आमतौर पर पूर्णिमा या अन्य शुभ अवसरों पर पूजा के साथ सुना जाता है। कथा में बताया गया है कि कैसे विभिन्न युगों में विभिन्न लोगों – एक गरीब ब्राह्मण, एक लकड़हारा, एक व्यापारी – ने इस व्रत को करके सत्य और निष्ठा के बल पर अपने दुखों से मुक्ति पाई और मनोवांछित फल प्राप्त किया। यह सत्य और भक्ति की महिमा पर एक सरल और आस्था-वर्धक ग्रंथ है।
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