इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक संभवतः डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रसिद्ध कृति “हू वर द शूद्राज़?” (Who Were the Shudras?) से प्रेरित या उसका अनुवाद है। इस युगांतकारी ग्रंथ में, डॉ. अंबेडकर ने भारतीय समाज में शूद्र वर्ण की उत्पत्ति के पारंपरिक ब्राह्मणवादी सिद्धांतों को चुनौती दी है। उन्होंने वैदिक और पौराणिक साहित्य के गहन अध्ययन के आधार पर यह तर्क दिया कि शूद्र मूल रूप से क्षत्रिय थे, जिन्हें ब्राह्मणों के साथ संघर्ष के कारण सामाजिक रूप से पदावनत कर दिया गया। यह पुस्तक अस्पृश्यता और वर्ण-व्यवस्था की जड़ों पर एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जो भारतीय समाजशास्त्र और इतिहास के अध्ययन में एक मील का पत्थर है।
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