इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह हिंदी के छायावादी युग के प्रमुख स्तंभों में से एक, ‘सुमित्रानंदन पंत’ के जीवन और काव्य पर एक आलोचनात्मक अध्ययन है। पंत जी को ‘प्रकृति का सुकुमार कवि’ कहा जाता है। रांगेय राघव जैसे प्रख्यात आलोचक द्वारा लिखित इस कृति में पंत के काव्य-विकास के विभिन्न चरणों, उनकी सौंदर्य-चेतना, उनकी भाषा की कोमलता, और उनके दार्शनिक चिंतन का गहन विश्लेषण किया गया है।
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