इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह प्रसिद्ध आलोचक रांगेय राघव द्वारा लिखी गई एक साहित्यिक आलोचना की पुस्तक है। इसमें गोस्वामी ‘तुलसीदास’ की रचनाओं, विशेषकर ‘रामचरितमानस’ के ‘कथा-शिल्प’ अर्थात कहानी कहने की कला का विश्लेषण किया गया है। राघव जी यह पड़ताल करते हैं कि तुलसीदास ने पात्रों का निर्माण, घटनाओं का संयोजन, और नाटकीयता का उपयोग कितनी कुशलता से किया है ताकि उनकी कथा इतनी प्रभावशाली और लोकप्रिय बन सके।
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