इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
स्वसमरानन्द’ एक आध्यात्मिक कृति प्रतीत होती है, जिसका अर्थ है ‘अपने स्वयं के स्वरूप के आनंद में मग्न होना’। यह पुस्तक संभवतः वेदांत या जैन अध्यात्म पर आधारित है, जो आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने और उसी में आनंदित रहने की शिक्षा देती है। इसमें आत्म-चिंतन, ध्यान और वैराग्य के माध्यम से सांसारिक दुखों से ऊपर उठकर शाश्वत आत्म-आनंद को प्राप्त करने की प्रक्रिया का वर्णन हो सकता है। यह ग्रंथ साधकों को बाहरी सुखों के बजाय अपने भीतर ही आनंद का स्रोत खोजने के लिए प्रेरित करता है।
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