इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
तंदुलवेयालिय’ जैन आगम साहित्य के दस ‘प्रकीर्णक’ (छोटे ग्रंथ) में से एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह ग्रंथ आत्मा, ब्रह्मांड और मोक्ष के बारे में गहरे दार्शनिक विचारों का सार प्रस्तुत करता है, विशेष रूप से तंदुल मत्स्य (चावल के दाने जितने छोटे मछली) के उदाहरण के माध्यम से। यह पुस्तक मूल प्राकृत गाथाओं और उनके हिंदी अनुवाद या व्याख्या पर आधारित हो सकती है। यह जैन दर्शन के गूढ़ सिद्धांतों को समझने के इच्छुक विद्वानों और गंभीर साधकों के लिए एक महत्वपूर्ण कृति है।
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